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राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने बिहार लोक भवन में राज्यपाल सचिवालय के पदाधिकारियों एवं कर्मियों के लिए आयोजित ‘कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) प्रशिक्षण’ कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सीपीआर जैसी बेसिक स्किल इमरजेंसी के समय किसी की जान बचाने में बेहद अहम हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में किसी दूसरे के आने का इंतजार करने के बजाय हमें खुद आगे बढ़कर मदद करनी चाहिए। इंसानियत सबसे पहले है और यदि हमारे पास किसी की जान बचाने का स्किल है, तो उसका इस्तेमाल करना हमारी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि सीपीआर की जानकारी का ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचना जरूरी है। इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने राज्य की सभी विश्वविद्यालयों में सीपीआर ट्रेनिंग आयोजित करने तथा सोशल मीडिया के जरिए इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कक्षा आठवीं और उससे ऊपर की कक्षाओं के छात्रों को भी सीपीआर की बेसिक ट्रेनिंग देने पर जोर दिया।

राज्यपाल ने कहा कि सीपीआर की असली कामयाबी तभी है, जब प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्ति जरूरत के समय इसका इस्तेमाल कर किसी की जान बचा सके। कार्यक्रम में जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटना के चिकित्सा निदेशक डॉ रवि शंकर सिंह ने सीपीआर की उपयोगिता बताई। क्लिनिकल कार्डियोलॉजी के निदेशक डॉ अजय कुमार सिन्हा एवं डॉ दीपा ने सीपीआर की प्रक्रिया समझाई। अस्पताल की टीम ने डिमॉन्स्ट्रेशन के जरिए प्रशिक्षण दिया, जबकि राज्यपाल सचिवालय के पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने सीपीआर का व्यावहारिक अभ्यास किया।

इस अवसर पर लेडी गवर्नर सबीहा हसनैन, अस्पताल के चिकित्सकगण, महिला इमदाद कमिटी के सदस्यगण, राज्यपाल सचिवालय के पदाधिकारी एवं कर्मी तथा अन्य लोग उपस्थित थे।


