योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राज्यस्तरीय कार्यशाला का हुआ आयोजन। पुलिस, आयुष्मान भारत अस्पताल के प्रतिनिधि को दिया गया प्रशिक्षण। डायल-112, टीएमएस 2.0 पोर्टल, पुलिस सत्यापन आदि पर विस्तार से हुई चर्चा।
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सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को तुरंत और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लागू पीएम राहत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बुधवार को एकदिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। पुराना सचिवालय स्थित अधिवेशन भवन में आयोजित इस कार्यशाला में डायल-112, टीएमएस 2.0 पोर्टल, पुलिस सत्यापन, आईरैड/ईडार प्रणाली एवं अस्पतालों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।

मौके पर परिवहन सचिव राज कुमार ने कहा कि पीएम राहत योजना सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। योजना का लाभ जरूरतमंद पीड़ितों तक बिना किसी अनावश्यक विलंब के पहुंचे, इसके लिए परिवहन, स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। सभी संबंधित पदाधिकारी योजना के प्रावधानों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाएं और क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।
उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों एवं अस्पतालों से पंजीकरण, सत्यापन और उपचार की प्रक्रिया को सुगम बनाने तथा योजना के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि योजना का व्यापक प्रचार प्रसार के लिए सभी अस्पतालों में पीएम राहत योजना का बोर्ड लगाया जायेगा तथा हाईवे के किनारे भी होर्डिंग का लगेगी।
गोल्डेन ऑवर में मदद से बच सकती है जिंदगियां: स्वास्थ्य सचिव
स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं राज्य के सामने एक बड़ी चुनौती हैं। दुर्घटना के बाद गोल्डेन ऑवर यानी पहले एक घंटे के भीतर घायल को अस्पताल पहुंचाकर बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसी उद्देश्य से पीएम राहत योजना शुरू की गई है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में अस्पतालों और पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अस्पतालों से सभी सड़क दुर्घटना पीड़ितों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने तथा योजना के प्रति संवेदनशील रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि चूंकि सड़क दुर्घटनाएं प्राय सड़कों और राजमार्गों के किनारे होती हैं, इसलिए आम लोगों को आसपास उपलब्ध पीएम राहत से संबद्ध अस्पतालों की जानकारी आसानी से मिलनी चाहिए। साथ ही, पीएम राहत से संबद्ध अस्पतालों की जानकारी गूगल मैप पर उपलब्ध हो।
आर्थिक बाधा के बिना मिलेगी इलाज: राज्य परिवहन आयुक्त
राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन ने बताया कि योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल पात्र पीड़ितों को अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य दुर्घटना के तुरंत बाद शुरुआती समय में जल्द से जल्द व्यक्ति को बिना किसी आर्थिक बाधा के आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
कार्यशाला में ईआरएसएस (डायल-112) की भूमिका एवं जिम्मेदारियों पर पुलिस उप महानिरीक्षक रामा शंकर राय द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया गया। साथ ही रोड सेफ्टी के राजीव कुमार ने टीएमएस 2.0 पोर्टल के माध्यम से दुर्घटना पीड़ितों के पंजीकरण की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। पुलिस सत्यापन, आईरैड/ईडार प्रणाली तथा इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस विभाग की भूमिका पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों की जिम्मेदारियों, कैशलेस उपचार तथा क्लेम प्रक्रिया के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस दौरान पंजीकरण, सत्यापन एवं उपचार से संबंधित व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए सभी संबंधित हितधारकों के बीच विचार-विमर्श भी हुआ।
इस मौके पर अपर पुलिस महानिदेशक (संचार एवं तकनीकी सेवाएं) अमित लोढ़ा, डीआईजी (यातायात) सुशांत सरोज, परिवहन विभाग के अपर सचिव प्रवीण कुमार, पटना के ट्रैफिक एसपी सागर कुमार झा इत्यादि उपस्थित थे।


