October 5, 2026

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आपदा प्रबंधन को जन-केंद्रित और प्रभावी बनाने पर उपाध्यक्ष दीपक कुमार का जोर। उत्कृष्ट आपदा मित्रों एवं ग्राउंड वर्कर्स को मिलेगी पहचान।

बिहार ब्रेकिंग 

बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सभागार में उपाध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में प्राधिकरण की गतिविधियों, कार्यक्रमों एवं आगामी कार्ययोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की शुरुआत नवनियुक्त उपाध्यक्ष के स्वागत के साथ हुई। प्राधिकरण के सदस्य पी एन राय ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका औपचारिक स्वागत किया। इस अवसर पर प्राधिकरण के माननीय सदस्य नरेंद्र कुमार सिंह, प्रकाश कुमार एवं शंभू दत्त झा, वित्तीय सलाहकार, प्राधिकरण के प्रोफेशनल्स, पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

बैठक में प्राधिकरण की संरचना, कार्यप्रणाली तथा राज्य में संचालित विभिन्न आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की विस्तृत जानकारी उपाध्यक्ष को दी गई। इस दौरान जन-जागरूकता, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, अग्नि सुरक्षा, आकाशीय बिजली से सुरक्षा, सड़क सुरक्षा, पशु सुरक्षा, तकनीकी नवाचार एवं जिला-स्तरीय आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्यों की समीक्षा की गई।

उपाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम की प्रभावशीलता का आकलन ग्राउंड लेवल पर करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्राधिकरण के सदस्यों एवं प्रोफेशनल्स को विद्यालयों का प्रत्यक्ष भ्रमण कर कार्यक्रम के क्रियान्वयन तथा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों में आपदा सुरक्षा के प्रति जागरूकता के वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन करने को कहा। मॉडल स्कूलों के अद्यतन पाठ्यक्रम के साथ विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के मॉड्यूल एवं विषय-वस्तु के प्रभावी समन्वय पर भी जोर दिया। उन्होंने आपदा मित्रों एवं अन्य जमीनी कार्यकर्ताओं के उत्कृष्ट कार्यों को प्रोत्साहित एवं प्रचारित करने तथा उनके लिए एक समर्पित प्रोत्साहन एवं पहचान पोर्टल विकसित करने का सुझाव दिया। इसमें आपदा मित्र, मास्टर ट्रेनर्स, जीविका दीदियों, आंगनवाड़ी सेविकाओं सहित अन्य ग्राउंड वर्कर्स के उत्कृष्ट कार्यों को सार्वजनिक पहचान देने की दिशा में पहल की जाएगी।

बैठक में स्लम एवं घनी आबादी वाले क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा को मजबूत करने तथा निजी अस्पतालों में प्रभावी फायर सेफ्टी ऑडिट सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। सरकारी अस्पतालों में अपनाई जा रही प्रभावी अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं को निजी अस्पतालों तक भी विस्तारित करने की दिशा में पहल करने का निर्देश दिया गया। आकाशीय बिजली से बचाव के लिए Electric Field Monitor (EFM), Lightning Protection Devices (LPDs) सहित आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा हुई। उपाध्यक्ष ने इनके व्यापक उपयोग से पहले तकनीकी परीक्षण, वैज्ञानिक मूल्यांकन एवं फील्ड ट्रायल पर जोर दिया। साथ ही पशु चिकित्सकों के प्रशिक्षण में पशुधन सुरक्षा, नाव दुर्घटना एवं जल सुरक्षा प्रशिक्षण तथा सरकारी वाहन चालकों के लिए सड़क सुरक्षा एवं सुरक्षित ड्राइविंग प्रशिक्षण शुरू करने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए नुक्कड़ नाटक, LED Van, डिजिटल फिल्म, सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग तथा जिला-स्तरीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्ययोजनाओं को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई।

                         

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