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महान स्वतंत्रता सेनानी तिलकामांझी के 276वें जयंती के अवसर पर भागलपुर में एक समारोह आयोजित किया गया। समारोह में आदिवासी समेत सभी समुदायों के लोगों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया और भागलपुर के तिलकामांझी चौक पर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वक्ताओं ने तिलकामांझी के संघर्ष और उनके बलिदान पर प्रकाश डाला और उनके बताये रास्ते पर चलने की बात कही।

जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भागलपुर के डिप्टी मेयर डॉ सलाउद्दीन और विशिष्ट अतिथि के तौर पर शरन्य राष्ट्रीय मानवाधिकार के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ इशान सिन्हा समेत अन्य कई लोग शामिल हुए। इस दौरान मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये गए जबकि आदिवासी पारंपरिक कार्यक्रम भी आयोजित किये गए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शरन्य राष्ट्रीय मानवाधिकार के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ इशान सिन्हा ने उनकी जीवनी पर प्रकाश डाला और कहा कि ऐसे तो देश के सबसे पहले स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मंगल पांडेय का नाम लिया जाता है लेकिन जब आप इतिहास पढेंगे तो सबसे पहले स्वतंत्रता सेनानी के रूप में तिलकामांझी का नाम सबसे आगे आता है।

डॉ इशान सिन्हा ने कहा कि तिलकामांझी ने सिर्फ अपने समाज या आदिवासी समाज की लड़ाई नहीं लड़ी बल्कि उन्होंने दबे कुचले और शोषित सभी 00वर्गों के लोगों की लड़ाई लड़ी। उन्होंने अंग्रेजों के साथ लोहा लिया और अंतिम समय तक वे हमारी लड़ाई लड़ते रहे। यही वजह है कि हम आदिवासी समेत सभी समुदाय के लोग उन्हें भगवान का दर्जा दे कर पूजते हैं। वे हमारे लिए आदर्श हैं और हमेशा ही आदर्श रहेंगे। हमारा सौभाग्य है कि उनकी जन्मस्थली भागलपुर का सुल्तानगंज है और यह धरती ऐसे वीर योद्धा को पा कर गर्वान्वित महसूस करती है। हम गौरव करते हैं अपनी धरती पर। तिलकामांझी जयंती समारोह का संचालन हेम्ब्रम मुर्मू ने किया जबकि आदिवासी समुदाय के दर्जनों लोगों ने भी उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।



